गोरखपुर बस्ती मण्डल के 25 लाख बच्चे आंकड़ों में भरपेट भोजन कर रहे हैं लेकिन हकीकत बिल्कुल उलट है। असल में इन बच्चों की रोटी से खिलवाड़ हो रहा है। इनके हिस्से का अनाज और भोजन बनाने की लागत का उपभोग अफसर, कोटेदार, प्रधान, पार्षद और प्रधानाध्यापकों का रैकेट कर रहा है।
गोरखपुर-बस्ती मण्डल के 15690 परिषदीय स्कूलों में 15605 में मिड डे मील बनने का रिकार्ड है। इन विद्यालयों में 2505910 बच्चों को भरपेट भोजन खिलाने का दावा शिक्षा प्रशासन का है। मगर यह सच नहीं है। सच यह है कि सुदूर ग्रामीण अंचलों से लेकर महानगर के 60 फीसदी स्कूलों में चूल्हा जलता ही नहीं है। कभी कभार कोरम पूरा किया जाता है। ऊपर से नीचे तक मिली भगत है इसलिए न किसी को डर है और न भय।
आंकड़ों के जरिये किस तरह गोरखधंधा चल रहा है, इसका अंदाजा शासन को भेजी गयी एक विभागीय रपट से लगता है। जिस महीने में जिलाधिकारियों की पहल पर सभी एबीएसए तीन दिन तक पांच-पांच स्कूलों की जांच में लगे थे और अनगिनत विद्यालयों में मिड डे मील का चूल्हा जलता नहीं मिला, उस माह की जांच में भी मिड डे मील की रिपोर्ट उपलब्धियों से भरी है। हैरानी की बात यह है कि कुशीनगर जिले में 99.16, गोरखपुर में 100, देवरिया में 98.95, महराजगंज में 96.91, बस्ती में 100, संतकबीरनगर में 99.92 और सिद्धार्थनगर के सौ फीसदी स्कूलों में मिड डे मील बनता पाया गया। जांच के बाद सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने कुछ विद्यालयों में मिड डे मील न बनने की शिकायत भी की। तय हुआ कि जिन विद्यालयों में मिड डे मील का चूल्हा नहीं जलता मिला वहां के प्रधानों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होगा लेकिन किसी भी प्रधान के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं कराया गया। सूत्र बताते हैं कि ग्राम शिक्षा समिति और वार्ड शिक्षा समिति को मिड डे मील के नाम पर एक निश्चित कमीशन तय कर दिया गया है। ग्रामीण अंचलों की बात छोड़ दें तो गोरखपुर जैसे महानगर में भी प्राथमिक विद्यालय मोहद्दीपुर कन्या, प्राथमिक विद्यालय मोहद्दीपुर रेलवे, प्राथमिक विद्यालय रायगंज बालक, प्राथमिक विद्यालय अंधियारीबाग समेत दो दर्जन विद्यालयों में चूल्हा जलता ही नहीं है। जहां जलता भी है वहां मानक का उल्लंघन होता है।
गोरखधंधे का दूसरा पहलू यह है कि स्कूलों में फर्जी नामांकन है। आस पास पढ़ने वाले गैर मान्यता प्राप्त कांवेंट स्कूलों के बच्चों का भी नाम परिषदीय स्कूलों में चलता है। उनके हिस्से की रोटी तो सीधे सीधे रैकेट के पेट में चली जाती है। मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक मृदुला आनन्द का कहना है कि मिड डे मील के लिए सबसे पहले अभिभावक का जागरूक होना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि जहां चूल्हे नहीं जल रहे या मानक का उल्लंघन हो रहा है वहां सख्त कार्रवाई की जायेगी।

No comments:
Post a Comment