Friday, October 16, 2009

                                  अंग्रेजी में दिया जायेगा  पश्चिम बंगाल के मदरसों में  शिक्षा

            पश्चिम बंगाल सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री अब्दुस सत्तार ने  कहा, "हम पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था के आधुनिकीकरण में विश्वास करते हैं ताकि हमारे बच्चे उत्कृष्ट बच्चों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सके."
          उन्होंने कहा कि इसी शैक्षिक सत्र में दस मदरसों में शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी कर दिया जाएगा. आने वाले कुछ वर्षों में बाकी के 566 मदरसों में इसे लागू किया जाएगा.
इन मदरसों में 70 इसी वर्ष से शुरू किए गए हैं जिनमें 34 सिर्फ़ लड़कियों के लिए हैं.सत्तार, जो ख़ुद एक मदरसा में शिक्षक रह चुके हैं, का कहना था कि धार्मिक स्कूलों के पाठ्यक्रम में आधुनिकीकरण की प्रक्रिया कुछ महीनों से जारी है. पश्चिम बंगाल के मदरसों में आधुनिक विज्ञान और गणित की पढ़ाई पहले की शुरू की जा चुकी है. सत्तार का कहना था कि अमरीका और पाकिस्तान से विशेषज्ञों का दल मदरसों में आए इस बदलाव का अध्ययन कर चुके हैं. आधुनिक शिक्षा से वंचित पश्चिम बंगाल में मदरसा शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन सोहराब हुसैन ने बताया, "अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई किए बिना हमारे बच्चों को बेहतरीन शिक्षा नहीं मिल सकती है. इस वजह से हम सभी सरकारी मदरसों और सरकार से स्वीकृत मदरसों में अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा देने की सिफ़ारिश करते हैं." हम पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था के आधुनिकीकरण में विश्वास करते हैं ताकि हमारे बच्चे उत्कृष्ट बच्चों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सके अब्दुस सत्तार, पश्चिम बंगाल सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री
पश्चिम बंगाल में जब मार्क्सवादी पहली बार सत्ता में आए थे तब उन्होंने प्राइमरी स्तर पर अंग्रेजी को शिक्षा से हटा दिया था. लेकिन दो दशक बाद उन्होंने फिर से अंग्रेजी को प्राइमरी स्तर पर लागू कर दिया.
            बंगाल सरकार की इस बात को लेकर काफ़ी आलोचना हुई थी कि अंग्रेजी में दक्षता हासिल नहीं होने के कारण बंगाल के बच्चे अखिल भारतीय स्तर पर होने वाली प्रतियोगिता में पिछड़ रहे हैं.
          राजेंद्र सच्चर कमिटी ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा कि मुसलमान आधुनिक शिक्षा के अवसरों से वंचित हैं. आठ करोड़ की जनसंख्या वाले पश्चिम बंगाल में 26 प्रतिशत आबादी मुसलमानों की है जिनमें ज्यादातर ग़रीब किसान या छोटे कारोबारी है जो अपने बच्चों को मदरसों में ही पढ़ने भेज सकते हैं. सोहराब हुसैन कहते हैं कि इस वजह से जब तक हम मदरसों की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक नहीं बनाएँगे तब तक ज्यादातर मुस्लिम बच्चों को हम अच्छी शिक्षा नहीं दे सकते.

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