Friday, October 16, 2009

                                                              जर्मनी और मुसलमान
      जर्मनी में रहनेवाले मुसलमानों को जर्मन भाषा सीखनी चाहिये, मुस्लिम समुदाय के बच्चों को इस्लाम की धार्मिक शिक्षा भी जर्मनी में दी जाए और जर्मन विश्वविद्यालयों में मौलवी बनने के लिये प्रशिक्षण कोर्स शुरू किये जाएं. इसके अलावा मस्जिद बनाने की अनुमति के नियमों को आसान बनाया जाए और मुस्लिम समुदाय के बच्चों को नौकरी और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें.
     कुछ इस तरह के प्रस्ताव और सिफारिशों के साथ जर्मनी अपने यहां बढ़ती मुस्लिम आबादी को समायोजित करने की कोशिश कर रहा है.जर्मनी की राजधानी बर्लिन में जर्मन इस्लामिक कांफ्रेंस के दौरान जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक जर्मनी में मुसलमानों की संख्या तय अनुमान से 10 लाख ज़्यादा हो गई है.शरणार्थी और आव्रजन के संघीय ब्यूरो की इस रिपोर्ट के मुताबिक पहले यहां करीब 30 लाख मुसलमान थे जो अब बढ़कर 40 लाख हो गये हैं यानी कि कुल आबादी का पाँच प्रतिशत.
        मुसलमानों की संख्या और उनकी सामाजिक दशा पर जर्मनी में ये पहली आधिकारिक रिपोर्ट मानी जा रही है.
भिन्न संस्कृति रिपोर्ट के मुताबिक 40 लाख मुसलमानों में से करीब 65 प्रतिशत मुसलमान टर्किश मूल के हैं और शेष दक्षिण पूर्वी यूरोप के देशों, अफ़्रीका और कुछ अफ़ग़ान मूल के हैं. पश्चिमी समाज में मुसलमानों का समन्वय तभी सफल हो सकता है जब वो बिना शर्त लोकतांत्रिक मूल्यों को स्वीकारें गृह मंत्री वोल्फगांग शॉय्बले सांस्कृतिक तौर पर भिन्न इस आबादी का सामाजिक और धार्मिक रूप से जर्मन समाज के साथ मेल-जोल बने, सरकार के सामने ये एक बड़ी चुनौती है. इस चुनौती की चिंता जर्मनी के गृह मंत्री वोल्फगांग शॉय्बले के इस बयान में देखी जा सकती है जो उन्होंने काहिरा विश्वविद्यालय में अपने भाषण के दौरान दिया. उन्होंने कहा, "पश्चिमी समाज में मुसलमानों का समन्वय तभी सफल हो सकता है जब वो बिना शर्त लोकतांत्रिक मूल्यों को स्वीकारें."
      शॉयब्ले के इस बयान को फ्रांस के राष्ट्रपति सरकोजी के उस ऐतिहासिक भाषण से भी जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के बुर्का पहनने पर सवाल उठाए हैं. समन्वय का सवाल तब संवेदनशील हो जाता है जब मुस्लिम महिलाओं के हेडस्कार्फ़ पहनने, मुस्लिम बच्चियों के जर्मन स्कूलों में तैराकी और यौन शिक्षा से कथित परहेज, रमजान के महीने में परीक्षा और जर्मन स्कूलों में कथित भेदभाव और उससे असंतोष, मस्जिद निर्माण की अनुमति और मस्जिदों के कामकाज की पद्धति और अंतिम संस्कार जैसे मुद्दे उठते हैं जिनसे शेष जर्मन समाज की आए दिन टकराहट होती है.
       आदर्श स्थित हालांकि इस संवेदनशील मुद्दे पर खुलकर कोई बोलना नहीं चाहता. जर्मनी के फ़्रायबुर्ग शहर के एक रेस्त्रां में काम करनेवाले 22 साल के सुलेमान फ़र्राटे से जर्मन बोलते हैं, "मैं बचपन में ही यहां आ गया था और मेरे लिये यही मेरा देश है." बांग्लादेश से जर्मनी आकर बसे काजी मोहम्मद तुफैल मानते हैं, "एक संदेह हमेशा हमारा पीछा करता रहता है लेकिन हम भी अपने ही घेट्टो में रहते हैं."एक स्थानीय पत्रकार कहते हैं, "ये एक आदर्श स्थिति होगी कि मुसलमान यहां मुख्यधारा में शामिल हो पाएं वरना जर्मन और मुस्लिम समाज की बुनियाद में ही फ़र्क है."
          मुस्लिम समुदाय के खुद अपने भी अंतर्विरोध हैं जहां प्रगतिशील तबका जर्मन कानूनी व्यवस्था और खुलेपन का समर्थक है वहीं रूढ़िवादि लोगों की अपनी शिकायतें औऱ वर्जनाएं हैं. सूत्रों के अनुसार ऐसे ही एक संगठन ने बर्लिन के इस्लामिक सम्मेलन में उस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया जिसमें मुसलमान संगठनो से अपनी फंडिंग व्यवस्था को सार्वजनिक करने के लिये कहा गया था.
                                  अंग्रेजी में दिया जायेगा  पश्चिम बंगाल के मदरसों में  शिक्षा

            पश्चिम बंगाल सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री अब्दुस सत्तार ने  कहा, "हम पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था के आधुनिकीकरण में विश्वास करते हैं ताकि हमारे बच्चे उत्कृष्ट बच्चों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सके."
          उन्होंने कहा कि इसी शैक्षिक सत्र में दस मदरसों में शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी कर दिया जाएगा. आने वाले कुछ वर्षों में बाकी के 566 मदरसों में इसे लागू किया जाएगा.
इन मदरसों में 70 इसी वर्ष से शुरू किए गए हैं जिनमें 34 सिर्फ़ लड़कियों के लिए हैं.सत्तार, जो ख़ुद एक मदरसा में शिक्षक रह चुके हैं, का कहना था कि धार्मिक स्कूलों के पाठ्यक्रम में आधुनिकीकरण की प्रक्रिया कुछ महीनों से जारी है. पश्चिम बंगाल के मदरसों में आधुनिक विज्ञान और गणित की पढ़ाई पहले की शुरू की जा चुकी है. सत्तार का कहना था कि अमरीका और पाकिस्तान से विशेषज्ञों का दल मदरसों में आए इस बदलाव का अध्ययन कर चुके हैं. आधुनिक शिक्षा से वंचित पश्चिम बंगाल में मदरसा शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन सोहराब हुसैन ने बताया, "अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई किए बिना हमारे बच्चों को बेहतरीन शिक्षा नहीं मिल सकती है. इस वजह से हम सभी सरकारी मदरसों और सरकार से स्वीकृत मदरसों में अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा देने की सिफ़ारिश करते हैं." हम पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था के आधुनिकीकरण में विश्वास करते हैं ताकि हमारे बच्चे उत्कृष्ट बच्चों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सके अब्दुस सत्तार, पश्चिम बंगाल सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री
पश्चिम बंगाल में जब मार्क्सवादी पहली बार सत्ता में आए थे तब उन्होंने प्राइमरी स्तर पर अंग्रेजी को शिक्षा से हटा दिया था. लेकिन दो दशक बाद उन्होंने फिर से अंग्रेजी को प्राइमरी स्तर पर लागू कर दिया.
            बंगाल सरकार की इस बात को लेकर काफ़ी आलोचना हुई थी कि अंग्रेजी में दक्षता हासिल नहीं होने के कारण बंगाल के बच्चे अखिल भारतीय स्तर पर होने वाली प्रतियोगिता में पिछड़ रहे हैं.
          राजेंद्र सच्चर कमिटी ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा कि मुसलमान आधुनिक शिक्षा के अवसरों से वंचित हैं. आठ करोड़ की जनसंख्या वाले पश्चिम बंगाल में 26 प्रतिशत आबादी मुसलमानों की है जिनमें ज्यादातर ग़रीब किसान या छोटे कारोबारी है जो अपने बच्चों को मदरसों में ही पढ़ने भेज सकते हैं. सोहराब हुसैन कहते हैं कि इस वजह से जब तक हम मदरसों की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक नहीं बनाएँगे तब तक ज्यादातर मुस्लिम बच्चों को हम अच्छी शिक्षा नहीं दे सकते.